बच्चों के साथ मिलकर करने वाला आसान ध्यान
नमस्ते बहनों, आज सुबह जब मैं रसोई में चाय बना रही थी और बाहर बच्चों का शोर गूंज रहा था, तभी मुझे लगा कि इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने साथ-साथ बच्चों के मन को शांत करना कितना भूल जाते हैं। संयुक्त परिवार में रहते हुए, जहां हर वक्त घर में चहल-पहल रहती है, बच्चों के लिए माइंडफुलनेस या ध्यान की बात करना थोड़ा कठिन लग सकता है। लेकिन मेरी दादी हमेशा कहती थीं कि मन की शांति की शुरुआत घर के छोटे-छोटे कोनों से ही होती है।
बच्चों का ध्यान: खेल-खेल में ध्यान की शुरुआत
बच्चों को एक जगह शांत बिठाना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसलिए हमें इसे एक नियम नहीं, बल्कि एक 'सचेत खेल' बनाना होगा। पारिवारिक ध्यान का मतलब यह नहीं है कि हम उन्हें घंटों आंखें बंद करके बिठाएं। बल्कि, यह उनके बच्चों का मानसिक विकास करने और धैर्य बढ़ाने का एक सुंदर जरिया है। जब हम उनके साथ बैठते हैं, तो उन्हें एक सुरक्षित और शांत वातावरण का अहसास होता है।
सांसों का खेल: सरल श्वास तकनीक
आइए, आज हम एक बहुत ही सरल माइंडफुलनेस अभ्यास सीखते हैं जिसे आप अपने बच्चों के साथ रोज कर सकती हैं। इसे मैंने 'गुब्बारे वाली सांस' का नाम दिया है:
- बच्चों से कहें कि वे अपने पेट पर हाथ रखें।
- गहरी सांस लेते हुए महसूस करें कि उनका पेट एक सुंदर पीले गुब्बारे की तरह फूल रहा है।
- धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए महसूस करें कि गुब्बारे की हवा बाहर निकल रही है।
यह 'सांसों का खेल' बच्चों की एकाग्रता को बढ़ाता है और उनके चंचल मन को शांत करना सिखाता है।

दैनिक अभ्यास: शांत वातावरण और सकारात्मक आदतें
घर में एक छोटा सा कोना, जहां तुलसी का पौधा हो या जहां सुबह की प्यारी धूप आती हो, वहां बैठकर केवल पांच मिनट का यह अभ्यास बच्चों में सकारात्मक सोच और चित्त की स्थिरता लाता है। माता-पिता और बच्चे जब मिलकर यह करते हैं, तो आपसी रिश्ता भी मजबूत होता है। खेल-खेल में ध्यान करने से बच्चे बिना किसी दबाव के इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेते हैं और एक स्वस्थ मन की ओर कदम बढ़ाते हैं।
बहनों, हमें अपने बच्चों को केवल पढ़ाना-लिखाना ही नहीं है, बल्कि उन्हें भीतर से मजबूत और शांत भी बनाना है। आज से ही इस छोटे से प्रयास की शुरुआत करें। अगर वे शुरुआत में केवल एक मिनट भी शांत बैठें, तो भी खुद को और उन्हें शाबाशी दें। आप एक मां के रूप में बहुत अच्छा काम कर रही हैं, खुद पर भरोसा रखें।
घर में सुख-शांति बनी रहे। फिर मिलेंगे अगले ब्लॉग में।


