सुबह केवल दस मिनट में मन को शांत करने के लिए शुरुआती योगासन
नमस्ते बहनों, जब सुबह-सुबह रसोई में चाय का पानी चढ़ाने से पहले, आंगन में लगी तुलसी मैया पर सूरज की पहली किरण पड़ती है, तो मन में एक अजीब सा सुकून होता है। लेकिन जैसे ही घर के बाकी सदस्य जागते हैं, जिम्मेदारियों का एक ऐसा चक्रवात शुरू होता है जो रात को सोने तक नहीं थमता। संयुक्त परिवार में रहते हुए, अपने लिए 'me time' निकालना किसी सपने जैसा लगता है। कल सुबह जब मैं रसोई की खिड़की से बाहर देख रही थी, तो मुझे अहसास हुआ कि अगर हमारा मन ही अशांत रहेगा, तो हम पूरे परिवार को खुशियां और सेहत कैसे दे पाएंगे? इसीलिए, आज मैं आपके लिए लेकर आई हूँ सुबह की दिनचर्या में से केवल दस मिनट का एक ऐसा सरल अभ्यास, जो बिना किसी तामझाम के आपके मन को शांत करना सिखाएगा।

सुबह के दस मिनट ही क्यों हैं इतने अनमोल?
मेरी प्यारी सखियों, सुबह का समय हमारे शरीर और मन दोनों के लिए एक वरदान की तरह होता है। इस समय हवा में एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा होती है। यदि हम इस समय केवल दस मिनट अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए निकाल लें, तो पूरे दिन की मानसिक थकान और दैनिक तनाव से लड़ने की शक्ति मिल जाती है। यह कोई जिम जाने या कठिन कसरत करने जैसा नहीं है, बल्कि यह तो अपने भीतर झांकने और मानसिक शांति पाने का एक बेहद सरल घरेलू उपाय है। जब हम सुबह का योग और प्राणायाम करते हैं, तो हमारे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे चिंता से राहत मिलती है।
शुरुआती अभ्यास के लिए 3 सरल आसन और प्राणायाम
इसके लिए आपको किसी महंगे योग मैट या विशेष कपड़ों की जरूरत नहीं है। आप अपने कमरे के एक कोने में या फर्श पर एक साफ सूती चादर बिछाकर भी इसे आसानी से कर सकती हैं।
1. अनुलोम विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom)
यह प्राणायाम हमारे मानसिक संतुलन को बनाए रखने के लिए रामबाण माना जाता है। - सबसे पहले सुखासन (पालथी मारकर) में आराम से बैठ जाएं। अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। - अपने दाहिने अंगूठे से दाईं नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से गहरी सांस अंदर लें। - अब बाईं नासिका को बंद करें और दाईं नासिका से सांस धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। - यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से दोहराएं। इसे शांत मन से 3 से 5 मिनट तक करें। इससे मन की एकाग्रता बढ़ती है और दिमाग शांत होता है।
2. भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama)
जब घर में बहुत शोर हो या दिमाग में विचारों का तूफान चल रहा हो, तो यह प्राणायाम तुरंत सुकून देता है। - अपनी आंखों को बंद करें और अपने दोनों हाथों के अंगूठों से कानों को हल्का सा बंद करें। - एक गहरी सांस लें और मुंह बंद रखते हुए 'ॐ' का उच्चारण करते हुए मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट की आवाज निकालें। - इस कंपन को अपने सिर और मस्तिष्क में महसूस करें। इसे 3 से 5 बार दोहराएं। यह तनाव प्रबंधन का सबसे सुंदर तरीका है।
3. शवासन (Shavasan)
सभी अभ्यासों के अंत में 2 मिनट के लिए शवासन में लेटना शरीर और मन को पूरी तरह से शांत कर देता है। - पीठ के बल सीधे लेट जाएं, पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें और हाथों को शरीर से थोड़ा दूर फैलाकर हथेलियां आसमान की तरफ रखें। - अपनी आंखें बंद करें और अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। महसूस करें कि हर सांस के साथ आपके शरीर से तनाव बाहर निकल रहा है।
दैनिक जीवन में इसे शामिल करने के व्यावहारिक तरीके
मुझे पता है आप सोच रही होंगी, 'भाभी जी, सुबह-सुबह तो बच्चों के स्कूल और घर के कामों की इतनी जल्दी होती है, समय कहाँ मिलता है?' लेकिन यकीन मानिए, इसके लिए आपको अपनी नींद खराब करने की जरूरत नहीं है। जब आप सुबह उठती हैं, तो बिस्तर छोड़ने से ठीक पहले, केवल 5 मिनट बिस्तर पर ही बैठकर अनुलोम विलोम कर लें। हमारी दादी-नानी भी कहती थीं कि दिन की शुरुआत अगर शांत मन से हो, तो घर के काम भी बिना किसी चिड़चिड़ेपन के हंसी-खुशी पूरे हो जाते हैं। यह आत्म-देखभाल का एक ऐसा तरीका है जो हमारे स्वस्त जीवन की नींव रखता है।
एक छोटी सी कोशिश, बड़ा बदलाव
मेरी प्यारी बहनों, खुद के लिए थोड़ा सा समय निकालना कोई स्वार्थ नहीं है, बल्कि यह तो हमारे परिवार के प्रति हमारे कर्तव्यों का ही एक हिस्सा है। जब आप अंदर से शांत और खुश रहेंगी, तभी आपके पूरे घर में भी सकारात्मक ऊर्जा का वास होगा। आज से ही इस छोटे से बदलाव को अपनी सुबह की दिनचर्या का हिस्सा बनाकर देखें। खुद पर ज्यादा दबाव न डालें, जितना बन पड़े उतने से ही शुरुआत करें।
आप सभी के घरों में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहे।
जय माता दी।


